अस्थमा: एक गम्भीर बीमारी

अस्थमा जिससे हम दमा भी कहते हैं यह बढ़ते प्रदूषण से उत्तपन होती है. आज कल दमा की बीमारी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं कारण हैं प्रदूषण अवेम अस्वस्थ खाना.यह बीमारी आज कल काफी बढती जा रही है.यह एक गंभीर बीमारी है जो की नाक के नलिकाओं से प्रभावित होती है.इससे खांसी,सांस लेने में दिक्कत,सांस फूलना इत्तेयादी  बीमारी होती हैं.वैसे तो इसका इलाज़ मुमकिन नहीं हैं पर फिर भी आयुर्वेदिक इलाज़ से इसका ठीक होना मुमकिन हैं.

आइए जानें अस्थमा का आयुर्वेद में इलाज के बारे में:

  • केला : एक पके केले को छिलके सहित सेंककर बाद में उसका छिलका हटाकर केले के टुकड़ो में पिसी काली मिर्च डालकर गर्म-गर्म दमे रोगी को देनी चाहिए। इससे रोगी को राहत मिलेगी।
  • लहसुन: लहसुन अस्‍थमा के इलाज में काफी कारगर साबित होता है। अस्‍थमा रोगी लहुसन की चाय या 30 मिली दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से अस्‍थमा में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है।
  • अजवाइन और लौंग : गर्म पानी में अजवाइन डालकर स्टीम लेने से भी अस्‍थमा को नियंत्रि‍त करने में राहत मिलती है। यह घरेलू उपाय काफी फायदेमंद है। इसके अलावा 4-5 लौंग लें और 125 मिली पानी में 5 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शुद्ध शहद मिलाएं और गर्म-गर्म पी लें। हर रोज दो से तीन बार यह काढ़ा बनाकर पीने से मरीज को निश्चित रूप से लाभ होता है।
  • तुलसी: तुलसी अस्‍थमा को नियंत्रि‍त करने में लाभकरी है। तुलसी के पत्तों को अच्छी तरह से साफ कर उनमें पिसी कालीमिर्च डालकर खाने के साथ देने से अस्‍थमा नियंत्रण में रहता है। इसके अलावा तुलसी को पानी के साथ पीसकर उसमें शहद डालकर चाटने से अस्‍थमा से राहत मिलती है।

अगर बीमारी ज्यादा बढ़ जाती हैं तो हेमिन तुरंत डॉक्टर से संकल्प करना चाहिए क्यूंकि जान है तो जहान हैं.

डॉक्टर से दवाई मंगवाने के लिए 9041 715 715 नंबर पर कॉल करें।

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