लिवर की सारी परेशानियों का कैसे करें उपचार ?


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लिवर से संबंधित समस्याओं से आजकल बहुत से लोग परेशान हैं। बहुत से लोग लिवर के छोटे, कठोर या सूजे होने की परेशानी से परेशानी रहते हैं। पुराना मलेरिया, ज्वर, कुनैन या पारा के दुर्व्यवहार, अधिक मधपान, अधिक मिठाई खाना, अमेबिक पेचिश के रोगाणु का यकृत में प्रवेश आदि कारणों से यकृत रोगो की उत्पत्ति होती हैं। बुखार ठीक होने के बाद भी यकृत की बीमारी बनी रहती है और यकृत कठोर और पहले से बड़ा हो जाता हैं। साथ ही वह रोगी अनेक दवाएं खा-खा कर परेशान हो जाते हैं। इस रोग के घातक रूप ले लेने से यकृत का संकोचन होता है।

यकृत रोगो में आँखों व चेहरा रक्तहीन, जीभ सफ़ेद, रक्ताल्पता, नीली नसे, कमजोरी, कब्ज, गैस और बिगड़ा स्वाद, दाहिने कंधे के पीछे दर्द, शौच आंवयुक्त कीचड़ जैसा होना, आदि लक्षण प्रतीत होते है। इसलिए आज हम आपको एक ऐसे घरेलू उपाय के बारे में बताने जा रहे हैं जिसको करने से आप लिवर से संबंधित बहुत सी परेशानिओं से सरलता पूर्वक छुटकारा पा सकते हैं। यदि आपका लिवर कठोर, छोटा अथवा सूजा हुआ है, तो इस उपाय को करने से आपको अचूक परिणाम मिल सकते हैं।

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चलिए जानते हैं इस उपाय के बारे में !!

आवश्यक सामग्री:-

  • कागज़ी निम्बू – 1 (अच्छे से पका हुआ)
  • काली मिर्च का चूर्ण
  • काला अथवा सेंधा नमक
  • सोंठ का चूर्ण
  • मिश्री का चूर्ण अथवा शकर
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प्रयोग इस प्रकार हैं:-

  • सर्व प्रथम कागज़ी निम्बू लेकर उसके दो टुकड़े कर लें।
  • फिर इसमें से बीज निकाल लें और आधे निम्बू के बिना काटे चार भाग कर लें।
  • ध्यान रहे भाग करने हैं पर टुकड़े अलग-अलग ना हो।
  • अब इस निम्बू के एक भाग में काली मिर्च का चूर्ण तथा दूसरे में काला नमक बाहर दें।
  • इसके बाद तीसरे भाग में सोंठ का चूर्ण तथा चौथे में मिश्री का चूर्ण भर दें।
  • अंत में इसको ऐसे ही रात को प्लेट में रखकर ढककर छोड़ दें।

सेवन की विधि:-

  • सुबह भोजन करने से 1 घंटे पूर्व इस निम्बू की फांक को धीमीं आँच पर तवे पर गर्म करें।
  • फिर इन्हें चूस लें।
  • अलग-अलग स्थिति में सात दिन से इक्कीस दिन लेने से लीवर सही हो जाता है।
  • इससे यकृत विकार ठीक होने के साथ पेट दर्द और मुंह का जायका भी ठीक हो जाएगा।

सावधानियाँ:-

  • पंद्रह दिन में इस प्रयोग के साथ जिगर ठीक हो जाएगा।
  • घी और तली वस्तुओं का प्रयोग कम से कम करें।
  • सब्जी में मसलों आदि का उपयोग ना करें।
  • लीची, आलूबुखारा, सेब, जामुन, आंवला, पपीता ईत्यादि फलों का सेवन अधिक करें।
  • टमाटर, पालक, गाजर, बथुआ, करेला, लोकी जैसी शाक-सब्जियां खाएं।
  • छाछ आदि का अधिक प्रयोग करें।
  • रोटी भी कम खाए। अच्छा तो यह है की जब उपचार चल रहा हो तो रोटी बिलकुल न खाकर सब्जिया और फल से ही गुजारा कर ले।
  • दो सप्ताह तक चीनी अथवा मीठा का इस्तमाल न करे। अगर दूध मीठा पीते हो तो चीनी के बजाए दूध में चार-पांच मुनक्का डाल कर मीठा कर ले।
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इसके साथ ये उपचार ज़रूर करे:-

  • जामुन के मौसम में 200-300 ग्राम बढ़िया और पके हुए जामुन प्रतिदिन खाली पेट खाने से जिगर की खराबी दूर हो जाती है।
  • एक सो ग्राम पानी में आधा निम्बू निचोड़कर नमक डालें (चीनी मत डाले) और इसे दिन में तीन बार पीने से जिगर की खराबी ठीक होती हैं।
  • आंवलों का रस 25 ग्राम या सूखे आंवलों का चूर्ण चार ग्राम पानी के साथ, दिन में तीन बार सेवन करने से पंद्रह से बीस दिन में यकृत के सारे दोष दूर हो जाते है।
  • जिगर रोगो में छाछ ( हींग का बगार देकर, जीरा काली मिर्च और नमक मिलाकर ) दोपहर के भोजन के बाद सेवन करना बहुत लाभप्रद है।
  • जिगर के संकोचन (Liver Cirrhosis) में दिन में दो बार प्याज खाते रहने से भी लाभ होता है।

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