सेतुबंधासन: अनेकों समस्यायों से छुटकारा पाने का रामबाण उपाय!!

कब्ज, एसीडिटी, समय पर भूख ना लगना, आंत संबंधी बीमारियां, कमर दर्द में से कोई भी समस्या आपको परेशान कर रही हो। इनमें से किसी भी समस्याओं से जड़ से छुटकारा पाना है तो नियमित रूप से सेतुबंध आसन करें। आसन निश्चित ही आपका एक नई ऊर्जा प्रदान करेगा तथा इन बीमारियों में राहत देगा।

सेतुबंधासन करने कि प्रक्रिया

  • शुरुआत में अपने पीठ के बल लेट जाएँ।
  • अपने घुटनो को मोड़ लें। घुटनो तथा पैरों को एक सीध में रखते हुए, दोनों पैरों को एक दुसरे से 10-12 इंच दूर रखते हुए फैल लें।
  • हाथों को शरीर के साथ रख लें। हथेलियाँ ज़मीन पर रहे।
  • साँस लेते हुए, धीरे से अपनी पीठ के निचले, मध्य तथा  फिर सबसे ऊपरी हिस्से को ज़मीन से उठाएँ।
  • धीरे से अपने कन्धों को अंदर की ओर लें।
  • बिना ठोड़ी को हिलाएं अपनी छाती को अपनी ठोड़ी के साथ लगाएँ तथा अपने कन्धों, हाथों व पैरों को अपने वज़न का सहारा दें।
  • शरीर के निचले हिस्से को इस दौरान स्थिर रखें। दोनों जंघा इस दौरान एक साथ रहेंगी।
  • चाहें तो इस दौरान आप अपने हाथों को ज़मीन पर दबाते हुए शरीर के ऊपरी हिस्से को उठा सकते हैं।
  • अपनी कमर को अपने हाथों द्वारा सहारा भी दे सकते हैं।
  • आसन को 1-2 मिनट बनाएँ रखें तथा साँस छोड़ते हुए हाथ सीधे कर कमर को नीचे कर लें।
  • पैरों को भी सीधा कर कुछ देर शवासन में विश्राम करें।

इस आसान के लाभ:-

  • फेफड़ों को खोलता है तथा थाइरोइड से सम्बंधित समस्या को दूर करता है।
  • पाचन क्रिया को ठीक करने में सहायता करता है।
  • मासिक धर्म व रजोनिवृति के दौरान मदद करता है।
  • पीठ की मासपेशियों को मज़बूत बनाता हैं। पीठ की मासपेशियों को आराम देता हैं। पीठ, छाती व गर्दन में अच्छा खिंचाव पैदा करता है।
  • मन को चिंतामुक्त करता है तथा तनाव काम करके आराम देता है।
  • उच्च रक्त चाप, अस्थमा, ऑस्टियोपोरोसिस व साइनस के लिए लाभदायक।
  • आसन रीढ़ की सभी कोशिकाओं को अपने सही स्थान पर स्थापित करने में सहायक है।
  • यह आसन कमर दर्द को दूर करने में भी सहायक है।

सावधानी:-

  • यदि आपको कमर व गर्दन से संबधित कोई परेशानी है तो आप यह आसन न करें।

डॉक्टर से अपनी समस्या शेयर करें 9041 715 715 नंबर पर मुफ्त परामर्श करें।

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