पेट के अल्सर का कैसे करें घरेलू उपचार ?

जब किसी दबाव अथवा ज़हरीले पदार्थ के सेवन के कारण पेट की दीवारों को बचाने वाली मूकोसा परत नष्ट हो जाती है तो अल्सर बनना शुरू होता है। इसे गैस्ट्रिक अलसर कहा जाता है। गैस्ट्रिक अल्सर होने के मुख्य लक्षण खट्टी डकारे, अम्ल की अधिकता, जलन, ऊपरी भाग का दर्द, उल्टी, जी मिचलना तथा भूख के कारण पेट में दर्द होना ईत्यादि होते हैं। गैस्ट्रिक अल्सर अलग-अलग स्थानों पर पानी पीने, मानसिक तनाव, भारी व दूषित खाना खाने ईत्यादि के कारण हो सकता है। इस रोग में पक्वाशय रोगग्रस्त हो जाता है जिससे पक्वाशय में रस की वृद्धि होती है। इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसको करने से आप उल्सर जैसी दर्दनाक व भयानक बीमारी से छुटकारा पा सकेंगे।

चलिए जानते हैं इन उपायों के बारे में !!

1. नींबू:-

  • 1 गिलास गर्म पानी में 1 कागजी नींबू को निचोड़कर पीने से गैस्ट्रिक अल्सर में लाभ मिलता है।
  • 1 गिलास में नींबू का रस निकालकर 2 से 3 चम्मच शहद मिलकार प्रतिदिन 3 से 4 बार पीना से आमाशय का जख्म ठीक होता है।

2. गाजर:-

  • गाजर का रस शहद के साथ प्रतिदिन 3 बार पीने से पक्काशय में होने वाले घाव व दर्द ठीक होता है।
  • गाजर का रस पीने से अल्सर की उल्टी बंद होती है।
  • गाजर के रस में किशमिश का रस मिलाकर पीने से गैस्ट्रिक अल्सर में आराम मिलता है।

इन वस्तुओं का ना करें सेवन:-

  1. तेल, घी, चटपटे, मसालेदा, भारी भोजन, भिंडी, करेला, आलू, फूलगोभी, अदरक का आचार, कालीमिर्च, कडुवा व खट्टे खाद्य पदार्थ, शहद, नशीले पदार्थ, सड़ी-गली चीजे, चाय-कॉफी आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इनके सेवन से यह पेट रसों के साथ मिलकर हाइड्रोक्लोरिक एसिड अधिक पैदा करता है जिससे पेट में अल्सर बन जाता है।

इन वस्तुओं का करें सेवन:-

  1. केला मूकोसा कोषों में बढ़ोत्तरी करता है जिससे पेट को रसायनों से बचाने के लिए दीवारे बनती हैं और गैस्ट्रिक अल्सर नहीं होता है।
  2. दूध, मौसमी, चोकर समेत आटे की रोटी, चने की रोटी, सत्तू, नींबू, लौकी, परवल, पालक, बथुआ, पत्तागोभी, नाशपाती, आलूबुखारा, गाजर का मुरब्बा और मटर आदि का सेवन करना गैस्ट्रिक अल्सर के रोगियों के लिए हितकारी होता है।

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