तुरई: पथरी, गांठ, गठिया और बालों के लिए वरदान !!


Ads

आज हम आपको एक ऐसी गुणकारी औषधि के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके सेवन से आप बहुत सी भयानक से भयानक बिमारियों को खत्म कर पाएंगे। इस औषधि का नाम है तोरई। तोरई अथवा तुरई अथवा तोरी एक प्रकार की सब्जी होती है और इसकी खेती भारत में सभी स्थानों पर की जाती है। पोषक तत्वों के अनुसार इसकी तुलना नेनुए से की जा सकती है। वर्षा ऋतु में तोरई की सब्जी का प्रयोग भोजन में अधिक किया जाता है। तोरई मीठी व कड़वी दो तरह की होती है इसकी प्रकृति ठंडी और तर होती है। उम्र से पहले बालों का सफेद होना आजकल आम बात हो गई है। इसका मुख्य कारण बिगड़ी हुई जीवनशैली है। समय पर ठीक से ना खाना-पीना, सही से नहीं सोना, जंक फूड खाना। तोरई के सेवन से बालों को पुनः काला किया जा सकता है। इसके साथ ही यह दर्द देने वाले मस्से भी ठीक करती है। 

चलिए जानते हैं इन लाभों के बारे में !!

1. लिवर:-

  • लगातार तुरई का सेवन करना सेहत के लिए बेहद हितकर होता है।
  • तुरई रक्त शुद्धिकरण के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है।
  • साथ ही यह लिवर के लिए भी गुणकारी होता है।

2. पीलिया:-

  • पीलिया होने पर अगर रोगी की नाक में 2 बूंद तोरई के फल का रस डाल दें, तो नाक से पीले रंग का द्रव बाहर निकलता है।
  • इससे पीलिया रोग जल्दी समाप्त हो जाता है।
READ  सफ़र के दौरान उल्टियाँ होने की परेशानी का कैसे करें उपाय ?

3. मस्से:-

  • आधा किलो तुरई को बारीक काटकर 2 लीटर पानी में उबालकर, इसे छान लें।
  • फिर प्राप्त पानी में बैंगन को पका लें।
  • बैंगन पक जाने के बाद इसे घी में भूनकर गुड़ के साथ खाने से बवासीर में बने दर्द और पीड़ा युक्त मस्से झड़ जाते हैं।

4. गठिया (घुटनों के दर्द में) रोग:-

  • पालक, मेथी, तोरई, टिण्डा, परवल आदि सब्जियों का सेवन करने से घुटने का दर्द दूर होता है।

5. बवासीर (अर्श):-

  • तोरई की सब्जी खाने से कब्ज ठीक होती है और बवासीर में आराम मिलता है।
  • कडवी तोरई को उबाल कर उसके पानी में बैंगन को पका लें।
  • बैंगन को घी में भूनकर गुड़ के साथ भर पेट खाने से दर्द तथा पीड़ा युक्त मस्से झड़ जाते हैं।

6. पेट दर्द:-

  • अपचन और पेट की समस्याओं के लिए तुरई की सब्जी बेहद कारगर इलाज है।
  • अधपकी सब्जी पेट दर्द दूर कर देती है।

7. दाद, खाज और खुजली:-

  • तुरई के पत्तों और बीजों को पानी में पीसकर त्वचा पर लगाएं।
  • इससे दाद, खाज और खुजली जैसे रोगों में आराम मिलता है।
  • वैसे ये कुष्ठ रोगों में भी हितकारी होता है।

8. मधुमेह:-

  • तुरई में इंसुलिन की तरह पेप्टाइड्स पाए जाते हैं।
  • इसलिए सब्ज़ी के तौर पर इसके इस्तेमाल से डायबिटीज़ में फायदा होता है।
READ  लीवर कैंसर का कैसे करें आयुर्वेदिक उपचार ?

9. बालों को काला करना:-

  • तुरई के टुकड़ों को छाया में सुखाकर कूट लें।
  • इसके बाद इसे नारियल के तेल में मिलाकर 4 दिन तक रखे।
  • फिर इसे उबालें और छानकर बोतल में भर लें।
  • इस तेल को बालों पर लगाने और इससे सिर की मालिश करने से बाल काले हो जाते हैं।

10. आंखों के रोहे तथा फूले:-

  • आंखों में रोहे (पोथकी) हो जाने पर तोरई (झिगनी) के ताजे पत्तों का रस को निकालकर रोजाना 2 से 3 बूंद दिन में 3 से 4 बार आंखों में डालने से लाभ मिलता है।

11. पेशाब की जलन:-

  • तोरई पेशाब की जलन और पेशाब की बीमारी को दूर करने में लाभकारी होती है।

12. चकत्ते:-

  • तोरई की बेल गाय के मक्खन में घिसकर 2 से 3 बार चकत्ते पर लगाने से लाभ मिलता है और चकत्ते ठीक होने लगते हैं।

13. फोड़े की गांठ:-

  • तोरई की जड़ को ठंडे पानी में घिसकर फोड़ें की गांठ पर लगाने से 1 दिन में फोड़ें की गांठ खत्म होने लगता है।

14. पथरी:-

  • तोरई की बेल गाय के दूध या ठंडे पानी में घिसकर रोज सुबह के समय में 3 दिन तक पीने से पथरी गलकर खत्म होने लगती है।

ध्यान रखें:-

  • तोरई पचने में भारी तथा आमकारक है। वर्षा ऋतु में तोरई का साग रोगियों के लिए लाभदायक नहीं होता है।
  • तोरई कफ तथा वात उत्पन्न करने वाली होती है, अत: जरूरत से अधिक इसका सेवन करना हानिकारक हो सकता है।
READ  कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, मोटापा, यूरिक एसिड, पेट के रोग और एसिडिटी का काल है ये प्रयोग

यदि यह जानकारी आपको अच्छी लगी तो इसे फेसबुक पर अपने दोस्तों संग शेयर अवश्य करें।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *